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वेल्लोर से न्यूज़ीलैंड तक: विराट कोहली और रोहित शर्मा को अपनी स्पिन पर नचाने आ रहा है रजनीकांत का यह फैन

न्यूज़ीलैंड के लेग स्पिनर आदित्य अशोक भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में विराट कोहली और रोहित शर्मा को चुनौती देने के लिए तैयार हैं। जानिए वेल्लोर में जन्मे इस खिलाड़ी की दिलचस्प कहानी और रजनीकांत से उनका खास कनेक्शन।

  • वेल्लोर का बेटा और न्यूज़ीलैंड का स्टार अब वडोदरा के मैदान में भारतीय दिग्गजों को देगा चुनौती
  • रजनीकांत के ‘स्टाइल’ और दादाजी की यादों के साथ मैदान पर उतरेगा यह लेग स्पिनर
  • बुमराह को ठीक करने वाले डॉक्टर ने बचाई आदित्य की कमर, अब कोहली-रोहित का विकेट है अगला लक्ष्य
  • महानता को करीब से महसूस करने का मौका, हार-जीत से परे सीखने की जिद पर अड़े आदित्य अशोक

भारत की गलियों से निकलकर सात समंदर पार न्यूज़ीलैंड की जर्सी पहनने वाले खिलाड़ी जब वतन वापस लौटते हैं, तो उनकी कहानी में एक अलग ही जज्बात होता है। आदित्य अशोक भी एक ऐसा ही नाम हैं। वेल्लोर में जन्मे और ऑकलैंड में पले-बढ़े इस लेग स्पिनर के लिए रविवार से वडोदरा में शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज महज एक टूर्नामेंट नहीं बल्कि खुद को साबित करने का सबसे बड़ा मंच है।

23 साल के आदित्य इस समय सातवें आसमान पर हैं और हों भी क्यों न? उनके सामने दुनिया के दो सबसे बड़े दिग्गज – विराट कोहली और रोहित शर्मा खड़े होने वाले हैं।

महानता को छूने और परखने की जिद

आदित्य के लिए यह सीरीज किसी सपने के सच होने जैसी है। उनका मानना है कि जब आप रोहित और विराट जैसे दिग्गजों के खिलाफ गेंदबाजी करते हैं, तो आप सिर्फ क्रिकेट नहीं खेलते बल्कि महानता को करीब से महसूस करते हैं। वे इसे दबाव के तौर पर नहीं बल्कि एक ऐसे अवसर के रूप में देख रहे हैं जहाँ वे अपनी स्पिन का जादू बिखेरकर खुद को परख सकें।

आदित्य कहते हैं कि इन खिलाड़ियों ने खेल के लिए जो किया है, वह बेमिसाल है। उनके सामने गेंदबाजी करना और उनसे सीखना ही अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

रजनीकांत का टैटू और दादाजी की यादें

आदित्य के गेंदबाजी वाले हाथ पर एक टैटू है—’एन वज़ी थनी वज़ी’ (मेरा रास्ता सबसे अलग है)। सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘पडयप्पा’ का यह मशहूर डायलॉग आदित्य के जीवन का फलसफा है।

यह टैटू न केवल थलाइवा के प्रति उनकी दीवानगी को दर्शाता है बल्कि उनके दिवंगत दादाजी की यादों को भी सहेज कर रखे हुए है जिनके साथ बैठकर उन्होंने यह फिल्म देखी थी। यह टैटू उन्हें याद दिलाता रहता है कि भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय अपना रास्ता खुद बनाना ही असली जीत है।

चेन्नई की तपिश और गेंदबाजी में सुधार

भारत आने से पहले आदित्य ने चेन्नई की सीएसके अकादमी में दो हफ्ते तक जमकर पसीना बहाया है। कोच श्रीराम कृष्णमूर्ति के मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी स्पिन को धार दी है। वे मानते हैं कि भारत की पिचें स्पिनरों के लिए जन्नत होती हैं लेकिन यहां की गर्मी और दबाव में खुद को शांत रखना बड़ी चुनौती है।

आदित्य अपनी गेंदबाजी में हर दिन एक प्रतिशत सुधार करने के मंत्र पर काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर प्रक्रिया सही है तो परिणाम अपने आप पक्ष में आएंगे।

चोट से वापसी और मेंटर्स का साथ

आदित्य का सफर इतना आसान भी नहीं रहा। कम उम्र में ही उन्हें कमर की गंभीर सर्जरी करानी पड़ी, जो किसी भी स्पिनर के लिए करियर खत्म होने जैसा डर पैदा कर सकती है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी सर्जरी उसी डॉक्टर (रोवन शाउटन) ने की, जिन्होंने जसप्रीत बुमराह और मयंक यादव का इलाज किया था।

अपनी रिकवरी के दौरान उन्होंने तरुण नेथुला और पॉल वाइजमैन जैसे गुरुओं से जो सीखा वह आज उनके काम आ रहा है। वडोदरा में पहले नेट सेशन के बाद भी उन्होंने सबसे पहले अपने मेंटर को मैसेज किया।

आदित्य अशोक अब पूरी तरह तैयार हैं। उनकी उंगलियां गेंद को घुमाने के लिए बेताब हैं और निगाहें रोहित-विराट के विकेट पर टिकी हैं। वडोदरा का मैदान गवाह बनेगा कि क्या वेल्लोर का यह लड़का वाकई अपना रास्ता ‘सबसे अलग’ बना पाता है या नहीं।

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