Haryana Hydrogen Train: जींद से सोनीपत के बीच दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, प्लांट को मिली 24 घंटे बिजली
Haryana Hydrogen Train: हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलने के लिए तैयार है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने जींद हाइड्रोजन प्लांट की बिजली आपूर्ति की समीक्षा की। जानिए कब शुरू होगा यह ऐतिहासिक सफर।
- जींद से सोनीपत के बीच दौड़ेगी देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
- बिना धुंए और शोर के सफर कराएगी यह स्वदेशी तकनीक
- जींद में देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट तैयार
- मुख्य सचिव ने बिजली आपूर्ति की समीक्षा की
- प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण में
Haryana Hydrogen Train: भारतीय रेलवे के इतिहास में एक ऐसा अध्याय जुड़ने जा रहा है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन लगती थी। हरियाणा की माटी अब न सिर्फ फसलों के लिए बल्कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के लिए भी जानी जाएगी।
जींद और सोनीपत के बीच जब यह ट्रेन अपनी पहली रफ्तार भरेगी, तो यह केवल दो शहरों की दूरी नहीं नापेगी बल्कि भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी जिनके पास ग्रीन एनर्जी से चलने वाली रेल तकनीक है।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को लेकर प्रशासन की हलचल अब तेज हो गई है। जींद में बने देश के सबसे बड़े हाइड्रोजन प्लांट को चालू करने के लिए बिजली की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित कर ली गई है।
हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में एक अहम बैठक की जिसमें बिजली निगम के बड़े अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि इस प्रोजेक्ट की राह में पावर कट जैसी कोई भी बाधा नहीं आनी चाहिए।
जींद में स्थापित यह प्लांट मामूली नहीं है। यहां तीन हजार किलोग्राम हाइड्रोजन स्टोर करने की क्षमता विकसित की गई है, जो इस ट्रेन के इंजन के लिए ईंधन का काम करेगी।
चूंकि हाइड्रोजन बनाने और उसे सुरक्षित रखने की प्रक्रिया काफी संवेदनशील होती है इसलिए प्लांट को 24 घंटे बिजली चाहिए।
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने भरोसा दिलाया है कि 11 केवी की सीधी लाइन से इस प्लांट को जोड़ा गया है ताकि कमीशनिंग और बाद के ऑपरेशन्स में कोई दिक्कत न आए।
यह ट्रेन आम ट्रेनों की तरह शोर नहीं मचाएगी और न ही जहरीला धुआं छोड़ेगी। इसकी चिमनी से धुएं की जगह सिर्फ पानी की भाप निकलेगी। ग्राउंड जीरो की रिपोर्टिंग और अफसरों की बातों से साफ है कि रेलवे अब कोयले और डीजल के दौर से निकलकर पूरी तरह ईको-फ्रेंडली होने की तैयारी में है।
मुख्य सचिव ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक ट्रेन नहीं बल्कि भारत का गौरव है इसलिए बैकअप सिस्टम और मेंटेनेंस की टीम को हमेशा अलर्ट मोड पर रखा जाए।
उत्तर रेलवे और हरियाणा सरकार के साझा प्रयासों का ही नतीजा है कि आज जींद का यह प्लांट अपनी फाइनल टेस्टिंग की दहलीज पर खड़ा है। मीटिंग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े बिजली निगम के प्रबंध निदेशक विक्रम यादव ने भी साफ किया कि बिजली की क्वालिटी और वोल्टेज पर खास नजर रखी जा रही है।
अब बस इंतजार है उस दिन का जब जींद के प्लेटफॉर्म से यह ‘भविष्य की सवारी’ अपनी पहली सीटी बजाएगी और पूरा देश हरियाणा की इस उपलब्धि का गवाह बनेगा।



