हरियाणा में दो खिलाड़ियों की मौत पर बवाल: हार्दिक राठी केस में FIR दर्ज, खेल ढांचे पर उठे बड़े सवाल
Haryana News: हरियाणा में खेल सुविधाओं की बदहाली एक बार फिर सुर्खियों में है। रोहतक में सब-जूनियर बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी की मौत के एक महीने बाद पुलिस ने आखिरकार पीड़ित परिवार की शिकायत पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 16 साल के हार्दिक की मौत उस वक्त हुई थी जब प्रैक्टिस के दौरान बास्केटबॉल हूप का लोहे का खंभा अचानक उसके ऊपर गिर पड़ा। यह घटना पूरे प्रदेश के खेल ढांचे पर गंभीर सवाल उठाती है।
रोहतक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि हार्दिक, जो सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाला था, उसकी फैमिली ने शनिवार को लिखित शिकायत दी थी। आरोप है कि जिस मैदान पर बच्चे प्रैक्टिस करते थे, उसकी हालत लंबे समय से खराब थी, लेकिन किसी ने सुध नहीं ली।
लाखनमाजरा के SHO समरजीत सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर बीएनएस की धारा 106 (लापरवाही से मौत) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, “परिवार ने उन सभी लोगों पर कार्रवाई की मांग की है, जिनकी अनदेखी की वजह से यह हादसा हुआ।”
लेकिन यह सिर्फ एक घटना नहीं थी। इसी तरह का हादसा झज्जर के बहादुरगढ़ में भी हुआ, जहां 15 वर्षीय अमन की जान चली गई। वह कई दिनों तक PGIMS रोहतक में जिंदगी की जंग लड़ता रहा, पर बच नहीं सका। दोनों हादसों ने हरियाणा के खेल ढांचे की असलियत उजागर कर दी—जहां टूटी सुविधाएं, जर्जर उपकरण और जिम्मेदारियों के बीच ठोकर खाती व्यवस्थाएं बच्चों की जान तक ले रही हैं।Haryana News
हार्दिक के पिता संदीप राठी की आवाज़ अब भी टूटती है जब वह कहते हैं,
“हमने मैदान की हालत को लेकर कई बार बताया, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अगर कार्रवाई हो जाती, तो आज मेरा बच्चा जिंदा होता।”
अमन के पिता सुरेश ने भी इसी तरह की शिकायत दर्ज कराई थी और अधिकारियों को सीधे-सीधे लापरवाही का दोषी ठहराया था। परिवारों का आरोप है कि प्रशासन की उदासीनता ने दो मासूम खिलाड़ियों का भविष्य ही नहीं, उनकी जिंदगी भी छीन ली।Haryana News
इन मौतों ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है। पार्टियों ने बयान जारी करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने की बात तो करती है, लेकिन ग्राउंड लेवल पर सुविधाएं बदहाल हैं। दूसरी तरफ परिवारों ने भी स्पष्ट कहा है कि अगर खेल ढांचे की समय पर मरम्मत और नियमित निरीक्षण होता, तो ये हादसे टाले जा सकते थे।Haryana News
अब जबकि एफआईआर दर्ज हो चुकी है, सवाल यह है कि क्या जांच केवल कागजों में सीमित रह जाएगी, या इन बच्चों की मौतें प्रदेश के खेल तंत्र में किसी बड़े सुधार की शुरुआत बनेंगी?



