गन्ना मूल्य बढ़ोतरी पर किसानों का फूटा गुस्सा: ₹30 की बढ़ोतरी मजाक, कम से कम ₹500 तय हो कीमत
Haryana News: गन्ना किसानों की उम्मीदों पर सरकार की ओर से घोषित 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी पानी फेरती दिख रही है। नई दरों के मुताबिक अगेती किस्म का दाम ₹405 और सामान्य किस्म का ₹395 तय किया गया है, लेकिन जमीनी हालात इससे कहीं ज्यादा खर्च की कहानी कह रहे हैं। इसी फैसले पर भारतीय किसान यूनियन वेलफेयर फेडरेशन के राष्ट्रीय सलाहकार प्रियव्रत ने तीखी नाराजगी जताई है।
प्रियव्रत का कहना है कि इस वक्त खेती महंगाई के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है—खाद से लेकर डीज़ल तक, बीज से लेकर मजदूरी और मशीनरी तक हर खर्च लगभग दोगुना हो चुका है। ऐसे समय में 30 रुपये की मामूली बढ़ोतरी किसानों के साथ “सीधा अन्याय” बताई जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि यह राशि न तो लागत निकालती है और न ही किसी किसानी परिवार को राहत देने की स्थिति में है।Haryana News
उन्होंने याद दिलाया कि पंजाब और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों में पहले से ही गन्ने का मूल्य अधिक दिया जा रहा है। ऐसे में उत्तराखंड के किसानों को कम कीमत देकर प्रतिस्पर्धा में पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। प्रियव्रत ने मांग उठाई कि राज्य सरकार गन्ने का भाव कम से कम ₹500 प्रति क्विंटल तय करे, ताकि किसान अपनी लागत वाजिब तरीके से निकाल सकें और खेती को टिकाऊ बना सकें।Haryana News
किसान संगठनों के भीतर भी चर्चा है कि यदि लागत बढ़ने की रफ्तार और समर्थन मूल्य की बढ़ोतरी के बीच यह अंतर यूँ ही बढ़ता रहा, तो युवा पीढ़ी खेती से और दूर होती जाएगी। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गन्ना एक अहम फसल माना जाता है, ऐसे में किसानों की नाराजगी सरकार के लिए एक बड़ा संकेत हो सकती है कि मूल्य निर्धारण को जमीनी वास्तविकताओं के हिसाब से दोबारा देखने की जरूरत है।Haryana News



