नई सैलरी, पुरानी आदतें? इन Golden Money Rules से बदलेगा आपका पूरा बजट गेम
अच्छी सैलरी के बावजूद पैसा नहीं टिकता तो वजह आपकी आदतें हो सकती हैं। नया साल फाइनेंशियल माइंडसेट बदलने का मौका देता है। खर्च-कमाई के बैलेंस और गोल्डन रूल्स से सेविंग और निवेश की सही शुरुआत हो सकती है।
- अच्छी सैलरी के बावजूद पैसा टिकता क्यों नहीं, इसकी जड़ में आदतें हैं
- नया साल सिर्फ तारीख नहीं, फाइनेंशियल माइंडसेट बदलने का मौका
- खर्च और कमाई के बीच बैलेंस बना तो सेविंग अपने आप बनेगी
- गोल्डन रूल्स तभी काम करते हैं जब उन्हें रोज़मर्रा में उतारा जाए
Golden Money Rules: अक्सर लोग अपनी सैलरी को ही अपनी सफलता का पैमाना मान लेते हैं। लेकिन महीने के आखिर में अगर अकाउंट बैलेंस जवाब दे जाए तो सवाल कमाई पर नहीं बल्कि आदतों पर उठता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि बिना सेविंग के न तो निवेश संभव है और न ही भविष्य की सुरक्षा। यही वजह है कि अच्छी इनकम के बावजूद आर्थिक दबाव बना रहता है।
नया साल पर नई फाइनेंशियल शुरुआत करो
नया साल सिर्फ कैलेंडर बदलने का नाम नहीं होता। यह सोच बदलने का भी मौका देता है। साल की शुरुआत में लोग नए संकल्प लेते हैं। कुछ पुरानी आदतें छोड़ने के, कुछ नई अपनाने के। अगर इस बार लक्ष्य आर्थिक मजबूती है तो सबसे पहले पैसों को देखने का नजरिया बदलना होगा। खर्च से पहले सेविंग को जगह देना यहीं से शुरुआत है।
सैलरी इतनी जल्दी खर्च कैसे हो जाती है?
ज्यादातर घरों में कोई तय प्लान नहीं होता। महीने की शुरुआत में सैलरी आती है और धीरे-धीरे घरेलू जरूरतें, ऑनलाइन शॉपिंग, बाहर का खाना और छोटे-छोटे बेवजह खर्च पूरे बजट को खा जाते हैं। समस्या तब बढ़ती है जब खर्च ट्रैक नहीं होते। नतीजा ये होता है की महीना खत्म, पैसा खत्म।
खर्च और कमाई के बीच संतुलन कैसे बने?
सेविंग का सीधा रास्ता बैलेंस से होकर जाता है। जरूरी खर्च पहले, गैर-जरूरी बाद में। घर का बना खाना, सीमित ऑनलाइन खरीदारी और एक तय बजट। ये छोटे फैसले बड़ा फर्क ला सकते हैं। खर्च पहचान में आएंगे तो कटौती अपने आप दिखने लगेगी।
मनी सेविंग के ‘गोल्डन रूल्स’ क्या कहते हैं?
फाइनेंशियल दुनिया में कुछ नियम सालों से आज़माए गए हैं। इनमे रूल ऑफ 72 यह समझने में मदद करता है कि आपका निवेश कितने साल में दोगुना होगा। 4% रूल रिटायरमेंट प्लानिंग की याद दिलाता है जो हर साल कुल बचत का सीमित हिस्सा ही खर्च करें। 10x रूल बड़े लक्ष्य सोचने के लिए प्रेरित करता है और 3x रूल जोखिम भरे निवेश में फैसला लेने से पहले सोचने का मौका देता है। तो क्या संभावित रिटर्न जोखिम से वाकई तीन गुना है?
इन नियमों को ज़िंदगी में कैसे उतारें?
नियम किताबों में अच्छे लगते हैं, फायदा तभी देते हैं जब वे आपकी इनकम, खर्च और सेविंग प्लान का हिस्सा बनें। निवेश से पहले अपनी जरूरत, समय और जोखिम सहने की क्षमता समझना जरूरी है। बिना सोचे निवेश मुनाफा नहीं बल्कि नुकसान भी दे सकता है। सही समझ के साथ उठाया गया छोटा कदम ही लंबे समय में बड़ी मजबूती बनता है।



